" संसार में स्वास्थ्य से बढकर कुछ भी नहीं. कहा भी गया है - 'प्रथम सुख निरोगी काया '. जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे तभी संसार के किसी भी सुख का आनन्द ले सकेंगे और इसके लिए आवश्यक है अपने स्वाथ्य की रक्षा करना, और फिर बीमार पड़कर इलाज कराने से बेहतर यही है की बीमार पड़ने से बचने के प्रयास किये जाये. इस ब्लॉग में स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर बहुमूल्य जानकारी दी गई है जो आपके स्वास्थ्य की देखभाल करने में काफी मददगार साबित होगी." " सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:"
Saturday, May 5, 2012
Sunday, August 31, 2008
विलक्षणताओं से भरा मानव शरीर
हमारे शरीर का ५० प्रतिशत भाग मांसपेशियों के रूप में है।प्रत्येक मांसपेशी अनेक तन्तुओं से मिलकर बनी है.ये तंतु बाल के समान पतले होते हैं पर मजबूत इतने की अपने वजन की तुलना में एक लाख गुना वजन उठा सकें.
औसतन मनुष्य के सिर में १२०००० बाल होते हैं।बालों की वृद्धि प्रतिमास तीन चौथाई इंच होती है.किसी के बाल तेजी से तो किसी के धीमी गति से बढ़ते हैं.
मनुष्य के बालों की आयु १।५ वर्ष से लेकर ६ वर्ष तक होती है. आयु पूरी करके बाल अपनी जड़ से टूट जाता है और उसके स्थान पर नया बाल उगता है.
हमारी एक वर्ग त्वचा में प्रायः ७२ फुट लम्बी तंत्रिकाओं का जाल बिछा होता है।इतनी ही जगह में रक्त नलिकाओं की लम्बाई नापी जाए तो वे भी १२ फुट से कम नहीं होंगी.
हमारे गुर्दे में १० लाख से भी अधिक नलिकाएं होती है।इन सबको एक लम्बी कतार में रखा जाए तो ११० किलोमीटर लम्बी डोरी बन जायेगी.
चमडी की सतह पर प्रायः दो लाख स्वेद ग्रन्थियां होती है,जिनमें से पसीने के रूप में हानिकारक पदार्थ बहार निकलते रहते है।पसीना दिखता तो तब है,जब वह बूंदों के रूप में बाहर आता है,लेकिन वह धीरे-धीरे हमेशा ही रिसते रहता है.
मनुष्य की दाढ़ी में औसतन ७५०० से १५००० बाल होते हैं तथा भौहों में लगभग ५५० बाल होते हैं।
एक वर्ष में हम एक करोड़ (१० मिलियन) बार साँस लेते है।
हमारे शरीर की सबसे कठोर हड्डी जबड़े की तथा मजबूत मांसपेशी जीभ की मानी जाती है।
हमारे गुर्दे एक घंटे में इतना रक्त छानते है,जिसका वजन शरीर के भार से दुगुना होता है.
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Sunday, July 27, 2008
क्यों चटकती है हड्डियाँ?
दरअसल हड्डियों के जोड़ों के चटकने के दो अलग-अलग कारण हैं.जब उँगलियाँ चटकाई जाती है,तब वे लगभग अपनी सीमा तक मोड़ दी जाती है.उँगलियों के जोड़ के आसपास द्रव पदार्थ भरा होता है,जिसमें वायु मिश्रित होती है.जब हम जाने-अनजाने में उँगलियाँ चटकाते हैं तो यह वायु बुलबुलों के रूप में द्रव पदार्थ से अलग होती है.इन्ही बुलबुलों के कारण आवाज पैदा होती है,जिसे हम उँगलियाँ चटकना कहते हैं.जब तक यह वायु दोबारा द्रव पदार्थ में घुलमिल नहीं जाती ,तब तक फ़िर से उँगलियाँ चटकाने पर यह आवाज नहीं आ सकती.
दूसरी ओर शरीर को ऐंठने,मोड़ने या अंगडाई लेने से हड्डियों के चटकने की आवाज आती है उसका कारण वे ऊतक हैं.जो मांसपेशियों ओर हड्डियों के बीच में रहते हैं.जब इन पर तनाव पड़ता है तो ये अपने स्थान से हट जाते हैं और इसी कारण से आवाज पैदा होती है,जिसे हम हड्डियाँ चटकना कहते हैं.इसकी पुनरावृत्ति का कोई निशिचत समय नहीं होता है.अर्थात कुछ लोगों में यह उसी समय दोबारा भी हो सकता है.कुछ के साथ नहीं भी हो सकता.