नीम अत्यन्त उपयोगी वृक्ष है। यह जड़ से लेकर फूल-पत्ती,तने और फल तक सभी औषधीय गुणों से परिपूर्ण वृक्ष है.आइये जाने कि किस प्रकार नीम के सभी अंग हमें लाभ पहुँचाते हैं:-
जड़ - नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
छाल-नीम की छाल पानी में घिसकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से वे ठीक हो जाते हैं।छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग तथा अन्य चर्म रोग ठीकहोते हैं।इसमें दोगुना पिसा सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया,दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है.
पत्तियां-नीम की कोमल नई कोपलों को दस-पन्द्रह दिन तक रोज चबाकर खाने से रक्त शुद्ध होता है।फोड़े-फुंसी आदि चर्म विकार नहीं होते.
दातुन-इससे मसुडे मजबूत बनते हैं तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।
फूल-नीम का फूल तथा निबोरियाँ खाने से पेट के रोग नहीं होते।
निबोरियाँ-निबोरी नीम का फल होता है.इससे तेल निकला जाता है.आग से जले घाव में इसका तेल लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है.
" संसार में स्वास्थ्य से बढकर कुछ भी नहीं. कहा भी गया है - 'प्रथम सुख निरोगी काया '. जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे तभी संसार के किसी भी सुख का आनन्द ले सकेंगे और इसके लिए आवश्यक है अपने स्वाथ्य की रक्षा करना, और फिर बीमार पड़कर इलाज कराने से बेहतर यही है की बीमार पड़ने से बचने के प्रयास किये जाये. इस ब्लॉग में स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर बहुमूल्य जानकारी दी गई है जो आपके स्वास्थ्य की देखभाल करने में काफी मददगार साबित होगी." " सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:"
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Friday, May 9, 2008
Monday, May 5, 2008
जब आप परेशान हों
- यदि आप पेट दर्द से परेशान हों तो आधा चम्मच जीरा और एक चम्मच चीनी धीरे-धीरे चबाये राहत मिलेगी।
- यदि आपको भूख कम लगती हों तो प्याज के रस में करेले का रस मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।
- यदि आप गठिया रोग से ग्रस्त हैं तो लहसुन के रस में कपूर मिलाकर मालिश करें,आराम मिलेगा।
- यदि आपको कब्ज की शिकायत हो तो पका पपीता खूब खाएं,कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाना भी लाभदायक होता है।
- प्रतिदिन प्रात: तुलसी की ५-६ पत्तियों का सेवन करें,इसके अनेक लाभ होते हैं,याददास्त बढ़ती है।
- सोयाबीन की अधिक मात्रा मे सेवन बालों के लिए अत्यन्त फायदेमंद है,क्योंकि इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है,और प्रोटीन बालों के लिए काफी लाभदायक है।
- यदि आपके मुंह में छाले हो गए हों तो पानी में फिटकरी मिलाकर कुल्ला करें।
- रात को पानी में भिगोए त्रिफला चूर्ण से सुबह उठकर आंखों को धोने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
- आधा चम्मच अदरक का रस और चम्मच शहद चाटने से खांसी में आराम मिलाता है।
- दाद, खाज-खुजली और फुंसी होने पर संतरे का रस पीने और ताजे छिलकों को त्वचा पर रगड़ने से लाभ होता है.
Sunday, May 4, 2008
बेल:आरोग्य का खजाना
ग्रीष्म ऋतु में बेल के फल का महत्वपूर्ण स्थान है।अनेक व्यक्ति गर्मियों में नियमित रूप से इसके रस का सेवन करते हैं.
- कलमी,सुपक्व,मधुर बेल के गूदे को सुबह मिट्टी के बर्तन में रखकर पानी डाल दिया जाता है।तीन-चारघंटे में पानी बहुत ठंडा हो जाता है.पानी में बेल के गुदे की मिठास,रंग,स्वाद और सुगंध का पूरा प्रभाव उतर जाता है.इस पानी का सेवन स्वास्थ्यवर्धक है.
- साधारण आहार के अलावा बेल के गुदे में एक विशेष धातु के गुण होते हैं।
- छाल और पत्तों के रस का जहाँ औषधियों में प्रयोग होता है,वहीं कच्चे फल के गुदे का अग्नि और मिटटी के साथ अथवा सूखे गूदे को कांजी के मिश्रण के मध्य रूप में प्रयोग किया जाता है।
- बेल के वृक्ष के मुख्य अवयव जड़ के निकट की छाल काप्रसिद्ध मिश्रण "वशमूल" में उपयोग किया जाता है।
- बेल के जड़ की छाल त्रिदोषनाशक (वात-पित्त-कफ),मीठी व हल्की होती है।बेल भारी,मल को बांधने वाला तथा पेट कीअग्नि को तीव्र करने वाला होता है.पका फल भारी,मीठा,तीखा,गर्मी बढाने वाला तथा त्रिदोषनाशक होता है.
- कच्चे बेल की सूखी गिरी को कांजी में भिगोकर सेवन करने से चेहरे पर तेज आता है और दिल की बीमारियों में भी फायदा होता है।
- तेज बुखार में बेल के पत्तों को पीसकर सिर पर लेप करना फायदेमंद होता है।
- बुखार तथा साँस के रोगको नियंत्रित करने के लिए बेल के जड़ की छाल का काढा पिलाना लाभप्रद होता है।
- तेज बुखार को कम करने के लिए बेलपत्र का काढा या बेलपत्र को पानी के साथ देना हितकर होता है.
Sunday, March 23, 2008
तरोताजा महकती सांसों के लिए
क्या आपके मित्र आपके पास बैठने से कतराते हैं? लोग नाक पर रूमाल रखकर आपसे बातचीत करते हैं।तो लोगों के इस व्यवहार को चेतावनी समझें। अवश्य ही आपके मुंह से आती दुर्गन्ध इसका कारण है।आप चाहे तो इससे छुटकारा पा सकते हैं-
मुंह की नियमित सफाई करें:- दोनों वक्त के भोजन के बाद कम से कम ११ बार पानी से कुल्ले व गरारे करें ताकि दांतों और गले में अन्न कण और चिकनाई बाकी न बचे। दांतों और मसूडों मे चिपका भोजन का अंश बैक्टीरिया पनपने का कारण हो सकता है।
जीभ की सफाई पर ध्यान दें:- भोजन करते समय अधिकांश हिस्सा चबाने की प्रक्रिया से पेट में चला जाता है,पर एक हल्की सी परत जीभ पर चिपक जाती है। इसे नियमित रूप से साफ करना आवश्यक है.
पेट साफ रखना भी जरूरी:- मुंह के साथ-साथ पेट साफ रखना भी जरूरी है, वरना पेट साफ न रहा तोमुंह भी साफ न रह सकेगा और दुर्गन्ध आएगी. मुंह और मलाशय साफ रखें, कब्ज न रहनेंदें और दुर्गन्ध वाले पदार्थों का सेवन न करें तो मुंह से दुर्गन्ध न आएगी।
दुर्गन्ध नाशक पदार्थों का सेवन करें:- मुख शुद्धि के अलावा सौफ़,मसालेदार व पिपरमेंट युक्त पान,दालचीनी,लौंगआदि पदार्थ मुंह मे रखकर चबाने से मुंह साफ व सुगन्धित रहता है इसलिए कुछ भी खाने या पीने के बाद इन पदार्थों का सेवन किया जाता है.
मुंह की नियमित सफाई करें:- दोनों वक्त के भोजन के बाद कम से कम ११ बार पानी से कुल्ले व गरारे करें ताकि दांतों और गले में अन्न कण और चिकनाई बाकी न बचे। दांतों और मसूडों मे चिपका भोजन का अंश बैक्टीरिया पनपने का कारण हो सकता है।
जीभ की सफाई पर ध्यान दें:- भोजन करते समय अधिकांश हिस्सा चबाने की प्रक्रिया से पेट में चला जाता है,पर एक हल्की सी परत जीभ पर चिपक जाती है। इसे नियमित रूप से साफ करना आवश्यक है.
पेट साफ रखना भी जरूरी:- मुंह के साथ-साथ पेट साफ रखना भी जरूरी है, वरना पेट साफ न रहा तोमुंह भी साफ न रह सकेगा और दुर्गन्ध आएगी. मुंह और मलाशय साफ रखें, कब्ज न रहनेंदें और दुर्गन्ध वाले पदार्थों का सेवन न करें तो मुंह से दुर्गन्ध न आएगी।
दुर्गन्ध नाशक पदार्थों का सेवन करें:- मुख शुद्धि के अलावा सौफ़,मसालेदार व पिपरमेंट युक्त पान,दालचीनी,लौंगआदि पदार्थ मुंह मे रखकर चबाने से मुंह साफ व सुगन्धित रहता है इसलिए कुछ भी खाने या पीने के बाद इन पदार्थों का सेवन किया जाता है.
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