" संसार में स्वास्थ्य से बढकर कुछ भी नहीं. कहा भी गया है - 'प्रथम सुख निरोगी काया '. जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे तभी संसार के किसी भी सुख का आनन्द ले सकेंगे और इसके लिए आवश्यक है अपने स्वाथ्य की रक्षा करना, और फिर बीमार पड़कर इलाज कराने से बेहतर यही है की बीमार पड़ने से बचने के प्रयास किये जाये. इस ब्लॉग में स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर बहुमूल्य जानकारी दी गई है जो आपके स्वास्थ्य की देखभाल करने में काफी मददगार साबित होगी." " सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:"
Monday, July 18, 2011
रोग निवारक 10 रामबाण नुस्खे...
1 . अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज से परेशान रोगी के लिये रामबाण औषधि है। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है तथा ये आंतों को शक्ति प्रदान करते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है.
2 . प्रतिदिन एक लहसुन की कली चबाकर खाने से दांत- दर्द से छुटकारा मिलता है.
3 . नीबू हृदय रोगों में गुणकारी फ़ल है। यह रक्तवाही नलिकाओं में कोलेस्टरोल जमने नहीं देता है। एक गिलास सामान्य गर्म पानी में एक नीबू निचोडें ,इसमें 2 चम्मच शहद मिलाएं और पी जाएं। यह प्रयोग सुबह करना चाहिये.
4 . पीसी हुई अलसी को ठंडे पानी में मिलाकर उसका लेप बनाकर सर के ऊपर लगाने से सिर दर्द से राहत मिलती है .
5. खांसी में तुलसी की पत्तियों व अदरक को पीसकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है.
6. सर्दी - जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है.
7 . पुदीने के २ चम्मच रस में काला नमक डालकर पीने से उदर विकार,गैस तथा पेट के कीडे नष्ट हो जाते हैं.
8 . नीम की छाल पानी में घिस कर फोडे-फुंसियों पर लगाने से ठीक हो जाते हैं.
9 . रात में सोते समय पैरों के तलवों में सरसों का तेल लगाने से अनिद्रा से छुटकारा मिलता है.
10 . रात में सोने से पहले सरसों के तेल को नाभि पर लगाने से होंठ नहीं फटते हैं .
Wednesday, June 1, 2011
नींद पर शोध
हैप्पी केमिकल
Sunday, March 27, 2011
तेज दिमाग चाहिए,तो अखरोट खाइए...
अखरोट में काफी मात्रा में ओमेगा-3 फैट, प्रोटीन और एंटी-ओक्सिडेंट पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाते हैं. इसे ब्रेन फ़ूड भी कहते हैं, क्योंकि ओमेगा-3 फैट दिमाग की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाता है.
Sunday, January 23, 2011
इन उपायों से हटायें कब्ज का कब्जा...
कब्ज, पाचन तन्त्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें मल बहुत कडा हो जाता है तथा मलत्याग में बहुत मुश्किल होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।कब्ज के मुख्य कारण:-
- कम रेशायुक्त आहार लेना.
- शरीर में पानी की कमी.
- शारीरिक श्रम की कमी.
- बड़ी आंत में घाव या चोट.
- मोटापा.
- तनाव.
- अनियमित दिनचर्या.
- पोटेशियम और कैलेशियम की कम मात्रा.
- मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या .
- अधिक से अधिक रेशायुक्त आहार का सेवन करना.
- ताजे फल व सब्जियों का अधिक सेवन करना.
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीना.
- नियमित व्यायाम, योगासन व सुबह कुछ देर टहलने की आदत डालना.
- गरिष्ठ, बासी व बाजारी खाद्य पदार्थों का सेवन नही करना.
- नियमित दिनचर्या रखना.
- उचित आहार-विहार रखना.
- २ चम्मच ईसबगोल 6 घंटे पानी में भिगोकर इतनी ही मिश्री मिलाकर पानी के साथ लेने से कब्ज से राहत मिलती है . केवल मिश्री और ईसबगोल मिला कर बिना भिगोये भी ले सकते हैं।
- सोते समय आधा चम्मच पिसी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्ज दूर होती है।
- त्रिफला चूर्ण चार ग्राम (एक चम्मच भर), २०० ग्राम हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।
- दो संतरों का रस खाली पेट प्रातः ८-10 दिन पीने से पुराना से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कैसा भी कब्ज हो, ठीक हो जाता है।
- अगर कब्ज के कारण पेट में बहुत तेज दर्द है, तो एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच कैस्टर ऑयल डालकर पीने से तुरंत आराम मिलता है .
- रात को किशमिश या अंजीर पानी में भिगोकर रख दें और उसे अगले दिन प्रातः इन्हें खाली पेट खाने से भी कब्ज दूर होता है.
- रात्रि को सोने से पहले एक चम्मच शुद्ध शहद एक गिलास ताजे पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्ज दूर होता है ।
- प्रातःकाल बिना कुछ खाए चार दाने काजू, 5 दाने मनुक्का के साथ खाने से भी कब्ज में लाभ होता है।
- पका हुआ बिल्व (बेल) फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पीने से फायदा होता है.
- अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से निष्कासित होता है।इनका सेवन अवश्य करना चाहिए.
- नींबू कब्ज में गुणकारी है। गुनगुने गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें।लाभ होता है ।
- हर रोज 1-2 गिलास जूस सहित कम से कम 8 गिलास पानी जरूर पियें। अपने भोजन में अनाज, ताजी-रेशेदार फल व हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें.प्रतिदिन योग- व्यायाम करें – सुबह-शाम टहलना व्यायाम की अच्छी शैली है। व्यायाम एवं अच्छी शारीरिक स्थिति पेट साफ रखने में सहायता करती है।
Friday, January 14, 2011
दस बहाने कर के ले गया दिल...

धूम्रपान (Smoking).
मांसाहार.
मदिरापान (Alcohal).
मोटापा (Obesity and Overweigh).
प्रदूषण (Pollution).
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure (Hypertension).
शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity).
मधुमेह (Diabetes).
तनाव (Stress).
असंतुलित खान-पान (Spicy Food).
Sunday, May 23, 2010
स्तनपान:- फायदे अनेक
-मां का दूध सुपाच्य होता है जिससे यह शिशु को पेट सम्बन्धी गड़बड़ियों से बचाती है.-शोधों से सिद्ध हुआ है कि लम्बे तक स्तनपान करने वाले बच्चे बाद के जीवन में उतने ही अधिक समय तक मोटापे से बचे रह सकते हैं.
- -स्तनपान शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है।
- -स्तनपान से दमा और कान सम्बन्धी बीमारियाँ नियंत्रित रहती है,क्योंकि मां का दूध शिशु की नाक और गले में प्रतिरोधी त्वचा बना देता है।
- -स्तनपान से जीवन के बाद के चरणों में उदर व श्वसन तंत्र के रोग,रक्त कैंसर, डाईबितिज तथा उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है।
- -स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है क्योंकि स्तनपान करानेवाली मां और उसके शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता प्रगाढ़ होता है।
- -स्तनपान कराने वाली माताओं को स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम होता है।
-माँ के दूध में मिलने वाले तत्व मेटाबोलिज्म बेहतर करते है.-प्रेगनेंसी (Pregnency ) के समय या स्तनपान के दौरान माँ का जो भी खान-पान रहता है वह बाद में बच्चे के लिए भी पसंदीदा बन जाता है.-माँ के दूध में पाए जाने वाले डी.एच.ए.(D.H.A.) व ए.ए.(A.A.) फैटी एसिड मस्तिस्क की कोशिकाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.-स्तनपान से बच्चे का आई. क्यू. अच्छी तरह विकसित होता है.
Sunday, September 21, 2008
घर का डॉक्टर:- चोकर (दिलाए रोगों से मुक्ति)
सामान्यतः गेहूं का आटा छानने के बाद जो चोकर निकलता है,उसे व्यर्थ समझकर फेंक दिया जाता है,जबकि चोकर व्यर्थ नहीं बल्कि पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के कारण प्रयोग करने योग्य होता है.कब्ज दूर करने,पाचन शक्ति ठीक रखने और नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए चोकर का सेवन करना अत्यन्त लाभदायक होता है. चोकर के प्रयोग से बिना दवाइयों के ही अनेक व्याधियों से छुटकारा पाया जा सकता है.
गेहूं के चोकर के विविध प्रयोग:-
- चोकर की रोटी :-गेहूं के प्रति किलो आटे में १०० ग्राम चोकर मिला लें और इस आटे की रोटी बनाकर खाएं. इससे अपच,कब्ज और उदर विकारों से छुटकारा मिलता है.
- चोकर का दलिया :-चोकर को शुद्ध घी में भूनकर रख लें.आवश्यक मात्रा में चोकर लेकर पानी में डालकर उबालें.मीठा बनाने के लिए उबलते समय उचित मात्रा में गुड मसलकर डाल दें और नीचे उतारकर घोलते हुए चिरोंजी, किशमिश, कटे हुए छुहारे डाल दें. अति स्वादिष्ट ,सुपाच्य, लाभकारी और साथ ही पौष्टिक चोकर का दलिया तैयार है.
- चोकर की चाय :- ५ कप पानी में २५ ग्राम चोकर लेकर तुलसी के १०-११ पत्ते और मुनक्का के १०-११ दाने डालकर अच्छी तरह से उबालें.मीठा करने के लिए इसमें शक्कर डाल दें.यह चाय भूख मारने और नींद उडाने वाली नहीं बल्कि शारीरिक विकारों को दूर कर विटामिन बी प्रदान कर शरीर को स्फूर्ति व शक्ति देने वाली है.
- चोकर का उबटन :- जितना चोकर लें उससे दुगुने पानी में चोकर को भिगोकर एक घंटे तक रखा रहने दें.स्नान से पहले इस चोकर को पूरे शरीर पर लगाकर खूब मसलें और स्नान कर लें.आपकी त्वचा रेशम सी चिकनी,चमकदार और मुलायम हो जायेगी.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: चोकर, कब्ज, नेत्र, अपच, तुलसी, विकार, घी, चाय, त्वचा, उबटन,
Sunday, August 31, 2008
विलक्षणताओं से भरा मानव शरीर
हमारे शरीर का ५० प्रतिशत भाग मांसपेशियों के रूप में है।प्रत्येक मांसपेशी अनेक तन्तुओं से मिलकर बनी है.ये तंतु बाल के समान पतले होते हैं पर मजबूत इतने की अपने वजन की तुलना में एक लाख गुना वजन उठा सकें.
औसतन मनुष्य के सिर में १२०००० बाल होते हैं।बालों की वृद्धि प्रतिमास तीन चौथाई इंच होती है.किसी के बाल तेजी से तो किसी के धीमी गति से बढ़ते हैं.
मनुष्य के बालों की आयु १।५ वर्ष से लेकर ६ वर्ष तक होती है. आयु पूरी करके बाल अपनी जड़ से टूट जाता है और उसके स्थान पर नया बाल उगता है.
हमारी एक वर्ग त्वचा में प्रायः ७२ फुट लम्बी तंत्रिकाओं का जाल बिछा होता है।इतनी ही जगह में रक्त नलिकाओं की लम्बाई नापी जाए तो वे भी १२ फुट से कम नहीं होंगी.
हमारे गुर्दे में १० लाख से भी अधिक नलिकाएं होती है।इन सबको एक लम्बी कतार में रखा जाए तो ११० किलोमीटर लम्बी डोरी बन जायेगी.
चमडी की सतह पर प्रायः दो लाख स्वेद ग्रन्थियां होती है,जिनमें से पसीने के रूप में हानिकारक पदार्थ बहार निकलते रहते है।पसीना दिखता तो तब है,जब वह बूंदों के रूप में बाहर आता है,लेकिन वह धीरे-धीरे हमेशा ही रिसते रहता है.
मनुष्य की दाढ़ी में औसतन ७५०० से १५००० बाल होते हैं तथा भौहों में लगभग ५५० बाल होते हैं।
एक वर्ष में हम एक करोड़ (१० मिलियन) बार साँस लेते है।
हमारे शरीर की सबसे कठोर हड्डी जबड़े की तथा मजबूत मांसपेशी जीभ की मानी जाती है।
हमारे गुर्दे एक घंटे में इतना रक्त छानते है,जिसका वजन शरीर के भार से दुगुना होता है.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: शरीर, बाल, त्वचा, गुर्दा, पसीना, रक्त, जीभ, दाढ़ी,
Sunday, July 27, 2008
क्यों चटकती है हड्डियाँ?
दरअसल हड्डियों के जोड़ों के चटकने के दो अलग-अलग कारण हैं.जब उँगलियाँ चटकाई जाती है,तब वे लगभग अपनी सीमा तक मोड़ दी जाती है.उँगलियों के जोड़ के आसपास द्रव पदार्थ भरा होता है,जिसमें वायु मिश्रित होती है.जब हम जाने-अनजाने में उँगलियाँ चटकाते हैं तो यह वायु बुलबुलों के रूप में द्रव पदार्थ से अलग होती है.इन्ही बुलबुलों के कारण आवाज पैदा होती है,जिसे हम उँगलियाँ चटकना कहते हैं.जब तक यह वायु दोबारा द्रव पदार्थ में घुलमिल नहीं जाती ,तब तक फ़िर से उँगलियाँ चटकाने पर यह आवाज नहीं आ सकती.
दूसरी ओर शरीर को ऐंठने,मोड़ने या अंगडाई लेने से हड्डियों के चटकने की आवाज आती है उसका कारण वे ऊतक हैं.जो मांसपेशियों ओर हड्डियों के बीच में रहते हैं.जब इन पर तनाव पड़ता है तो ये अपने स्थान से हट जाते हैं और इसी कारण से आवाज पैदा होती है,जिसे हम हड्डियाँ चटकना कहते हैं.इसकी पुनरावृत्ति का कोई निशिचत समय नहीं होता है.अर्थात कुछ लोगों में यह उसी समय दोबारा भी हो सकता है.कुछ के साथ नहीं भी हो सकता.
Sunday, July 20, 2008
कोई अंग सुन्न क्यों हो जाता है?
शरीर का कोई अंग यदि किसी दबाव में ज्यादा समय तक रहता है,तो वह सुन्न हो जाता है.वस्तुतः यह दबाव हाथ या पैर की नसों पर पड़ता है, ये नसें कई एक कोशीय फाइबर से बनी होती है. प्रत्येक एक कोशीय फाइबर अलग-अलग संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाने का कार्य करता है.इन फाइबरों की मोटाई भी कम-ज्यादा होती है.इसका कारण माइलिन नामक श्वेत रंग के पदार्थ द्वारा बनाई गई झिल्ली है.इन पर दबाव पड़ने से मस्तिस्क तक नसों द्वारा पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन और रक्त का संचरण नहीं हो पता है. मस्तिष्क तक उस अंग के बारे में पहुंचने वाली जानकारी रक्त और आक्सीजन के अभाव में अवरूद्ध हो जाती है.इस कारण वहां संवेदना महसूस नहीं हो पाती और वह अंग सुन्न हो जाता है.
जब उस अंग पर से दबाव हट जाता है तब रक्त और आक्सीजन का संचरण नियमित हो जाता है और पुनः उस अंग में संवेदनशीलता लौट आती है.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: हाथ, पैर, सुन्न, शरीर, अंग, नस, कोश(cell), मस्तिष्क, फाइबर, आक्सीजन(oxizen), रक्त, संवेदना, माइलिन,
Monday, June 30, 2008
शरीर पर पाए जाने वाले तिल (mole) का राज
त्वचा पर तिल की उपस्थिति को ज्योतिष विज्ञान (astrology) से जोड़ना कोरी कल्पना है।
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: तिल(mole), त्वचा(skin), कोशिका(cell), मेलानिन, ज्योतिष(astrology), रंग,
Saturday, June 7, 2008
फेस केअर टिप्स (face care tips)

- बेसन,गुलाब जल और नारियल तेल को मिलाकर त्वचा में लगाने से त्वचा में निखार आता है।
- मक्खन और हल्दी को मिलाकर चेहरे में लगाने से चेहरे में निखार आता है।
- लौंग को पिसकर पानी में घोलकर उसे चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे मिट जाते हैं।
- तुलसी पत्ते के रस में एक चौथाई भाग नींबू का रस मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है।
- मुल्तानी मिट्टी और नीम का रस,दोनों को मिलकर लगाने से चेहरे के कील-मुंहासे मिट जाते हैं और त्वचा निखर जाता है।
Sunday, May 18, 2008
कपूर:रोग भगाए दूर
घरेलू औषधि के रूप में कपूर अनेक प्रकार से प्रयोग किया जाता है:-
- कपूर को सरसों के तेल में मिलाकर कुछ देर धूप में रख दें।थोडी देर बाद यह तेल शरीर पर मलें,मांसपेशियों का दर्द,गठिया में आराम मिलता है.
- दाद,खुजली,फोड़ा-फुंसी आदि पर कपूर का अर्क लगाने से लाभ होता है।
- जुकाम,तेज खांसी,मूर्छा,क्षय आदि रोग हों तो कपूर सून्घायें।
- श्वास रोग में बलगम निकालने के लिए कपूर का उपयोग किया जाता है।
- कपूर को टूथपेस्ट और दंत मंजन में भी मिलाया जाता है.
Friday, May 9, 2008
नीम:आरोग्य का खजाना
जड़ - नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
छाल-नीम की छाल पानी में घिसकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से वे ठीक हो जाते हैं।छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग तथा अन्य चर्म रोग ठीकहोते हैं।इसमें दोगुना पिसा सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया,दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है.
पत्तियां-नीम की कोमल नई कोपलों को दस-पन्द्रह दिन तक रोज चबाकर खाने से रक्त शुद्ध होता है।फोड़े-फुंसी आदि चर्म विकार नहीं होते.
दातुन-इससे मसुडे मजबूत बनते हैं तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।
फूल-नीम का फूल तथा निबोरियाँ खाने से पेट के रोग नहीं होते।
निबोरियाँ-निबोरी नीम का फल होता है.इससे तेल निकला जाता है.आग से जले घाव में इसका तेल लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है.