Thursday, March 26, 2015

पहले बच्चे की मां बनने की बेहतर आयु है 25 से 29 -


पहले बच्चे की मां बनने की बेहतर आयु है 25 से 29 -

                                ज्यादातर महिलाएं मानती हैं कि मां बनने की आदर्श उम्र 25 से 29 वर्ष के मध्य है। एक सर्वे में अधिकांश महिलाओं ने इस बात को स्वीकार किया। हालांकि 17 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि इस तरह की आदर्श उम्र नहीं होती है। सर्वेक्षण के मुताबिक महिलाएं महसूस करती हैं कि यह उम्र खुद को कैरियर और आर्थिक रूप से संवारने के लिए बेहतर है, लेकिन वे मां बनने की चुनौती को भी इस उम्र में स्वीकार करती हैं।
                                21 प्रतिशत महिलाएं बायोलॉजिकल कारण को इसके लिए मानती हैं। महिलाएं ऐसे समय में बेहतर ताल-मेल चाहती हैं। इस उम्र को आदर्श उम्र करार देने की वजह आर्थिक और  के प्रति जागरूक होना है। सर्वेक्षण में शामिल की गई महिलाओं में आधे से ज्यादा माताएं थीं। सन्तानहीन महिलाओं में से 50 प्रतिशत ने दो बच्चों की मां बनने की योजना बनाई, जबकि एक तिहाई महिलाएं तीन से ज्यादा बच्चे चाहती हैं। 
                              ज्यादा महिलाएं मातृत्व को कैरियर से जोड़कर देखती हैं। 62 प्रतिशत महिलाओं ने स्वीकार किया कि बच्चे को जन्म देने का असर कैरियर पर विपरीत पड़ता है। मातृत्व का सुख प्राप्त कर रही महिलाओं में से 68 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने बच्चे के जन्म देने के समय से खुश हैं। ज्यादातर महिलाओं ने बच्चे का जन्म 35 के पहले दिया था। 60 प्रतिशत महिलाएं जिन्होंने बच्चे को 35 से 39 के बीच जन्म दिया, उनका मानना है कि काश वे जवान होती। आर्थिक मजबूरी के चलते महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद काम पर भी चली जाती हैं।

Wednesday, February 18, 2015

स्वाइन फ्लू : घबराएं नहीं, सावधान रहें


स्वाइन फ्लू : घबराएं नहीं, सावधान रहें

स्वाइन फ्लू के लक्षण - 

-- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
-- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न होना।
-- सिर में भयानक दर्द।
-- कफ और कोल्ड, लगातार खांसी।
-- उनींदे रहना, अधिक थकान होना।
-- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।
-- गले में खराश लगातार बढ़ना।

क्या करें -

-- लक्षण दिखे तो जांच कराएं।
-- डायबीटीज व इम्यूनिटी कम है, तो ज्यादा सावधानी रखें।
-- गर्भवती महिलाएं भीड़भाड़ वाली जैसी जगह जैसे सिनेमाहाल, बाजार या सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से बचें।
--स्कूली बच्चे खांसी होने पर क्लास में दूरी बनाए रखें। जानकारी टीचर को दें।
-- ट्रेन में यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।

ये सावधानी बरतें -

-- भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, कोई छींक रहा हो तो दूर रहें।
-- हाथों को साबुन या हैंड वाश से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं।
-- ऐसे व्यक्ति से जिसमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण हों, दूरी बनाकर रखें।
-- लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले मिलने या चूमने से बचें।
-- खांसने-छींकने के लिए टिश्यू पेपर या साफ तौलिया इस्तेमाल करें।
-- ताजा भोजन करें।
-- शुरूआती लक्षण पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
-- डाक्टरों की सलाह के बिना कोई भी दवाएं न खाएं।

इन्हें सावधान रहने की अधिक जरूरत -

-- 5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग व गर्भवती महिलाएं।
-- ये बीमारी वाले रहे अतिरिक्त सावधान
- फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी।
- मस्तिष्क संबंधी
- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग।
- मधुमेह।
- ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो।

आयुर्वेदिक इलाज -

-- 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
-- गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
-- आधा चम्मच हल्दी पौन गिलास दूध में उबालकर पिएं।

Tuesday, May 6, 2014

क्यों आती है छींक ?


क्यों आती है छींक ?

जब भी किसी व्यक्ति को छींक आती है, यह कहा जाता है कि उसे या तो सर्दी है या फिर एलर्जी है। लेकिन ऐसा होता नहीं है। आइये जानें कि हमें छींक क्यों आती है।
छींक वास्तव में शरीर की एक जटिल प्रतिक्रिया होती है। छींक तब आती है, जब नाक की तंत्रिकाएं नाक की झिल्ली पर सूजन, छोटे-छोटे कण या कोई ऐसा पदार्थ देखती है, जो एलर्जी कर सकते हैं, तो उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं। यही प्रतिक्रिया छींक के रुप में बाहर आती है। 
छींकने के लिए चिकित्सा विज्ञान में 'स्टर्नुटेशन' शब्द का प्रयोग किया जाता है और यह माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की नाक में स्टर्नुटेशन कारक तत्व जैसे- काली मिर्च, ठंडी हवा या धूल चली जाए, तो नाक की तंत्रिकाएं दिमाग को इसकी जानकारी देती हैं। दिमाग,गले, छाती और पेट को एक निर्दिष्ट तरीके से अपने को सिकोड़ने को कहता है, जिससे ये तत्व जल्दी से जल्दी शरीर से बाहर निकालें जा सकें। जब दिमाग से भेजे गये सन्देश का पालन होता है, तब छींक आती है।

Sunday, January 19, 2014

उच्च रक्तचाप या हाइपर टेंशन :-

                 
                      एक स्वस्थ व्यस्क का रक्तचाप 100/60 से 140/90mmhg के बीच होता है। यदि लगातार दो बार जांच से यह 140/90 mmhg से अधिक हो, तो उच्च रक्तचाप या हाइपर टेंशन की स्थिति बनती है। यह हृदय और रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों पर जोर डालता है और कोरोनरी आर्टरी डिसीस या कोरोनरी हृदय रोग के कारण बनते हैं।

Friday, December 13, 2013

एस.एम.एस. का नशा खतरनाक :-


एस.एम.एस. का नशा खतरनाक :- 
                                           इंदौर के एक मेडिकल कॉलेज ने अपने एक सर्वेक्षण के माध्यम से आगाह किया है कि एस.एम.एस. का नशा मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। जहां इससे क्रोध बढ़ता है वहीं बेचैनी और नींद नहीं आने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।                                       यह सर्वेक्षण 150 युवाओं पर किया गया, जिनकी उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच रही। इससे नतीजा यह आया कि हमेशा एस.एम.एस. का प्रयोग करने वाले युवाओं में डिप्रेशन और डर की भावना उत्पन्न हो रही है। इस सर्वे में 47% युवतियों व 39% युवकों ने माना कि मोबाइल फ़ोन के मैसेज के द्वारा हर समय अपने दोस्तों के संपर्क में रहने से उनकी दिनचर्या में गड़बड़ी आती है।                                       60% युवाओं ने माना कि इसके कारण उनकी पढ़ाई का भी नुकसान होता है। 40% युवतियों और 45% युवकों ने कहा कि वे अनिद्रा के शिकार हैं।लगभग 55% युवा अपने मैसेज का उत्तर नहीं मिलने से नाराज हो जाते हैं, वहीं 32% सोचने लगते हैं कि कोई भी उनके संपर्क में रहना पसंद नहीं करते।

Monday, December 9, 2013

सर्दियों में बचें सर्दी-जुकाम से...


सर्दियों में बचें सर्दी-जुकाम से... 
         
                              यूं तो सर्दियों का मौसम सेहत बनाने का होता है, लेकिन सेहत के प्रति लापरवाही रोग आमंत्रित करने में देर नहीं लगाती। इस मौसम में ज्यादातर होने वाला रोग है सर्दी- जुकाम। सामान्यत: यह कोई बड़ा रोग नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना कभी कभी घातक सिद्ध हो सकता है। आइये जानें सर्दी- जुकाम व इससे जुड़ी कुछ बातों को-
लक्षण:-           

         सर्दी- जुकाम के लक्षण सामान्य हैं। सर्दी होने के पहले बार-बार पानी पीने की इच्छा होना, गला सूखना गले में खराश, सिर भारी होना, छींक आना, नाक में खुजली होना।
सर्दी होने के कारण :-                            

                                     मुख्यत: सर्दी-जुकाम या नजला वायरस द्वारा फैलाया जाने वाला संक्रमण है,जो श्वसन प्रणाली के अगले हिस्से पर आक्रमण करता है। हमारी नाक और गले में एक अंदरूनी परत प्रतिरोधी कवच कहलाती है। जब हमें सर्दी होती है तो इसका मतलब है कि विषाणुओं ने इस प्रतिरोधी कवच को भेदकर भीतरी कोशिकाओं पर आक्रमण कर दिया है। श्लेष्मा युक्त परत में सूजन आने से श्वसन मार्ग अवरूद्ध हो जाता है और नाक से सांस लेने में कठिनाई होती है। श्लेष्मा (नाक से बहने वाला पानी) उत्पन्न करने वाली कोशिकाएं अधिक मात्रा में स्राव करती है जो नाक द्वारा बाहर बहने लगता है। घ्रानेंद्री भी रोगग्रस्त हो जाती है, इसलिए सुगंध या दुर्गन्ध भी महसूस नहीं होती।
कैसे फैलती है सर्दी :-                            आम धारणा है कि रोगग्रस्त व्यक्ति की छींक या उसकी नाक से निकले पानी द्वारा सर्दी एक से दूसरे में फैलती है यह काफी हद तक सही है, लेकिन हाथों से हाथों का संपर्क भी इस रोग के प्रसार में प्रमुख भूमिका निभाता है। रोगी से हाथ मिलाने या उसकी स्पर्श की हुई वस्तुओं को छूने से विषाणु हमारे हाथ पर आ जाते हैं और जब हम नाक या आंख को स्पर्श करते हैं तो वे हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
बचाव एवं उपचार :- 

-- सर्दी से पीड़ित व्यक्ति के रुमाल,नेपकिन, टॉवेल आदि अलग रखें और अलग से धोएं।
-- यथासंभव गर्म पदार्थों का सेवन करें।
-- सर्दी की अधिकता में चिकित्सक के परामर्श से एंटीबायोटिक दवाएं लें।
-- खांसी,बंद नाक और बदन दर्द के लिए अलग से दवाएं ले सकते हैं।
-- सर्दी अधिक हो तो घर पर ही आराम करें।
-- जुकाम में यदि तीन दिन से ज्यादा बुखार बना रहे तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। यह निमोनिया या सायनस संक्रमण भी हो सकता है।
-- गर्म पानी में कोल्ड रब डालकर भाप लें, इससे बंद नाक खुलेगी और सिर का भारीपन भी कम होगा।
-- सर्दी में घरेलू इलाज भी काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए तुलसी के पत्ते,
काली मिर्च, लौंग, अदरक का काढ़ा बनाकर पीना असरकारक होता है।



Sunday, December 1, 2013

विश्व एड्स दिवस विशेष ( 1दिसम्बर 2013 ) :- एच.आई.वी. HIV संक्रमण से कैसे बचें ?


एच.आई.वी. HIV संक्रमण से कैसे बचें ?

-- एक ही यौन साथी के साथ वफादार रहें।
-- प्रत्येक यौन संबंध के समय हर बार नये कंडोम का इस्तेमाल करें।
-- नई सुई या सिरिंज का ही इस्तेमाल करें।
-- पंजीकृत ब्लड बैंक से ही रक्त लें व दें।
-- प्रत्येक गर्भवती माता को एच.आई.वी. की जाँच कराएँ।

यौन रोग -:
                यौन रोग मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से फैलते हैं। प्रत्येक यौन सम्बन्ध के समय हर बार नये कंडोम का इस्तेमाल करने से यौन रोगों से बचा जा सकता है।

यौन रोग के लक्षण - :

-- पेट के निचले हिस्से में दर्द।
-- योनि,लिंग या गुदा से स्राव निकलना।
-- गुप्तांगों से या उसके आसपास फोड़े या छाले।
-- योनि या लिंग के पास सूजन।

ध्यान दें- यौन रोग एच.आई.वी. संक्रमण की आशंका को 5 से 10 गुना तक बढ़ा देता है।
यौन रोग को अनदेखा न करें, उसके लिए प्रशिक्षित डॉक्टर से पूरा इलाज करवाएं।

Thursday, November 28, 2013

क्यों गुड़गुड़ाता है पेट ?


 क्यों गुड़गुड़ाता है पेट :-
                               
                                 पेट में से आवाज आने को पेट गुड़गुड़ाना कहते हैं। प्राय: सभी लोगों ने इसे महसूस किया होगा। ऐसा तब होता है जब पेट ख़ाली रहता है और आमाशय की दीवारें भोजन को पचाने के लिए आपस में संकुचित होती हैं। पेट के खाली होने से वहां उपस्थित गैसें और पाचक तत्वों के कारण आवाजें उत्पन्न होती हैं,जिसे पेट का गुड़गुड़ाना कहा जाता है।
                                         वैसे तो भूख का पेट के गुड़गुड़ाने से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन भोज्य पदार्थ की अनुपस्थिति के कारण रक्त में कुछ निश्चित पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। भूख लगने पर मानव मस्तिष्क द्वारा इस बारे में संदेश प्रेषित किया जाता है। यह संदेश आमाशय और आंतो के लिए प्रेषित किया जाता है। रक्त में जैसे ही पोषक तत्वों की कमी होती है, मस्तिष्क से इस आशय का संदेश भेज दिया जाता है और यह संदेश मिलते ही आंते और आमाशय में यह प्रतिक्रिया होने लगती है।                                                                                    आंते और आमाशय इस बात के प्रति सतर्क नहीं रहते कि कौन सी चीज उन्हें संतुष्ट करेगी। इसलिए उनमें होने वाली प्रतिक्रिया के फलस्वरूप वहां उपस्थित गैसों और पाचक तत्वों में ही गति होने लगती है। इस कारण से पेट में गुड़गुड़ाने की आवाजें आने लगती है।

Sunday, October 27, 2013

स्वामी रामदेव द्वारा योग शिविरों के दौरान बताये जाने वाले चमत्कारिक प्रयोग :-


मोटापा एवं मधुमेह नाशक दलिया-
गेंहू 500 ग्राम,बाजरा 500 ग्राम,चावल 500 ग्राम,साबुत मूंग 500 ग्राम। सभी को समान मात्रा में लेकर, सेंककर दलिया बना लें। इसमें अजवाईन 20 ग्राम तथा सफेद तिल 50 ग्राम भी मिला लें। आवश्यकतानुसार लगभग 50 ग्राम दलिया को 400 ग्राम पानी में डालकर पकाएं,स्वादानुसार सब्जियों का हल्का नमक मिला लें। नियमित रूप से 15-30 दिन तक दलिया का सेवन करने से मधुमेह समाप्त हो जाता है। मोटापे से पीड़ित ह्रदय रोगी इस दलिया का नियमित सेवन कर निरापद रूप से अपना वजन कम कर सकते हैं।

ह्रदयरोग,अम्लपित्त,उदर रोग एवं मोटापे में लाभप्रद लौकी का रस -
लौकी 500 ग्राम,पुदीना पत्र 7नग,तुलसी पत्र 7नग। उक्त सभी से 1कप रस निकालकर प्रतिदिन प्रात: काल खाली पेट पीने से ह्रदय की धमनियों में हुए अवरोध भी खुल जाते हैं। अम्लपित्त एवं समस्त उदर रोगों का नाश करने के लिए लौकी रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

पुरानी खांसी की अचूक दवा-
काली मिर्च दिनभर में 5-7 नग धीरे-धीरे चूसने से खांसी में पहले ही दिन से तत्काल लाभ मिलता है। एक बार में 2-3 काली मिर्च मुंह में डालकर चूसें। वर्षों पुरानी खाँसी भी इस प्रयोग से ठीक होते देखा गया है।

Saturday, October 19, 2013

Saturday, September 21, 2013

जानिए डायलिसिस Dialysis के बारे में :-


जानिए डायलिसिस Dialysis  के बारे में :-
                            जब कभी हमारा वृक्क यानि गुर्दा Kidney ठीक से कार्य नहीं कर पाता तब शरीर में यूरिया Urea की मात्रा अचानक बढ़ जाती है,इस स्थिति को युरीमिया कहते हैं. ऐसे रोगियों को रूधिर की यूरिया तथा दूसरे उत्सर्जी पदार्थों को एक कृत्रिम उपकरण द्वारा हटाया जाता है. इस क्रिया को हीमोडायलिसिस कहते हैं. इस क्रिया में रोगी के रुधिर को मुख्य धमनी से बाहर करके 0°C तक ठंडा किया जाता है. उपकरण के अंदर रुधिर सेलोफोन झिल्ली की बनी नलिकाओं में बहता है. इस कारण नलिकाओं के अंदर बहते रुधिर के उत्सर्जी पदार्थ विसरित होकर उपकरण के द्रव में आ जाते हैं, फलत: रुधिर उत्सर्जी पदार्थों से मुक्त हो जाता है. इस क्रिया को डायलिसिस कहते हैं.

Thursday, September 12, 2013

गर्भावस्था के दौरान उल्टी क्यों होती है ?



Why vomitting occurs during pregnancy ?
गर्भावस्था के दौरान उल्टी क्यों होती है ? 

During pregnency placenta produces certain toxins which need to be expelled out and this requirement is fulfilled by vomitting. Even mother's stomach may also produce some.In earlier times drugs were given to stop vomitting as a result,the toxins accumulated and cut the parts of foetus,a condition called phocomelia. Now a days this does not happen due to more advanced drugs which effect (neutralise) the toxins. This is why vomitting occurs during pregnency.

Monday, July 29, 2013

ऐसे दूर भगाएँ मुंहासे :-


ऐसे दूर भगाएँ मुंहासे :-

-- मुंहासे कब्ज या पेट सम्बन्धी विकारों के कारण भी होता है,इसलिए पेट ठीक रखें। कब्जियत होने न दें. 
-- हल्दी में एंटीबायोटिक गुण होने के कारण मुंहासों पर इसका लेप लाभकारी है. 
-- नारियल का पानी चेहरे पर लगायें , इससे छोटी फुंसियाँ खत्म हो जाएँगी।


Friday, June 28, 2013

बेल:आरोग्य का खजाना


बेल:आरोग्य का खजाना-

-- ग्रीष्म ऋतु में बेल के फल का महत्वपूर्ण स्थान है।अनेक व्यक्ति गर्मियों में नियमित रूप से इसके रस का सेवन करते हैं.

-- कलमी,सुपक्व,मधुर बेल के गूदे को सुबह मिट्टी के बर्तन में रखकर पानी डाल दिया जाता है।तीन-चारघंटे में पानी बहुत ठंडा हो जाता है.पानी में बेल के गुदे की मिठास,रंग,स्वाद और सुगंध का पूरा प्रभाव उतर जाता है.इस पानी का सेवन स्वास्थ्यवर्धक है.

-- साधारण आहार के अलावा बेल के गुदे में एक विशेष धातु के गुण होते हैं।

-- छाल और पत्तों के रस का जहाँ औषधियों में प्रयोग होता है,वहीं कच्चे फल के गुदे का अग्नि और मिटटी के साथ अथवा सूखे गूदे को कांजी के मिश्रण के मध्य रूप में प्रयोग किया जाता है।

-- बेल के वृक्ष के मुख्य अवयव जड़ के निकट की छाल काप्रसिद्ध मिश्रण "वशमूल" में उपयोग किया जाता है.

-- बेल के जड़ की छाल त्रिदोषनाशक (वात-पित्त-कफ),मीठी व हल्की होती है।बेल भारी,मल को बांधने वाला तथा पेट कीअग्नि को तीव्र करने वाला होता है।पका फल भारी,मीठा,तीखा,गर्मी बढाने वाला तथा त्रिदोषनाशक होता है.

-- कच्चे बेल की सूखी गिरी को कांजी में भिगोकर सेवन करने से चेहरे पर तेज आता है और दिल की बीमारियों में भी फायदा होता है.

-- तेज बुखार में बेल के पत्तों को पीसकर सिर पर लेप करना फायदेमंद होता है।

-- बुखार तथा साँस के रोगको नियंत्रित करने के लिए बेल के जड़ की छाल का काढा पिलाना लाभप्रद होता है।

-- तेज बुखार को कम करने के लिए बेलपत्र का काढा या बेलपत्र को पानी के साथ देना हितकर होता है.

Thursday, April 25, 2013

मधुमेह :- उपयोगी जानकारी


मधुमेह :- उपयोगी जानकारी 



रक्त में शर्करा का एक मानक स्तर होता है .

सुबह खाली पेट 70 से 100 mg/dl के बीच और खाना खाने के 2 घंटे बाद 120 से 140 mg/dl के बीच के स्तर को सामान्य माना जाता है .

जब रक्त में शर्करा इन सामान्य स्तर से अधिक रहने लगती है तब मधुमेह की शुरुआत होना कहा जाता है, और जब यह 180 mg/dl के स्तर के ऊपर चली जाती है तो शर्करा पेशाब में निकलने लगती है और तब इसे मधुमेह रोग का स्थापित होना कहा जाता है .


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